रतलाम. इलेक्ट्रिफाइड हो चुके रतलाम-नीमच सेक्शन में रेलवे ने शनिवार रात पहली बार बिजली के इंजन से मालगाड़ी चलाई। सावधानी के तौर पर रेलवे ने मालगाड़ी के खाली रैक का इस्तेमाल किया। यह प्लेटफाॅर्म 7 से रात 12.40 बजे रवाना होकर रात 3.30 बजे हर्कियाखाल (नीमच) पहुंचा। वापसी में यही इंजन फिर खाली मालगाड़ी लेकर सुबह 5.42 बजे हर्कियाखाल से रवाना होकर सुबह 9.35 बजे रतलाम पहुंचा।
नवंबर में मंदसौर-नीमच सेक्शन को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की मंजूरी मिलने के बाद से रेलवे मालगाड़ी चलाने की योजना बना रहा था। शनिवार को दिनभर मालगाड़ी के खाली रैक के इंतजाम में लगा रहा लेकिन नहीं मिल पाया। रात को नागदा तरफ से आए रैक को प्लेटफार्म सात पर लेकर चलाया गया। अब तीन माह तक रेलवे इस सेक्शन में मालगाड़ियों को बिजली के इंजन से चलाएगी। यात्री गाड़ी चित्तौड़गढ़ तक इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा होने के बाद ही चलेगी।
आरई के अधिकारी करते रहे चेकिंग
मालगाड़ी को लेकर जाने वाले इलेक्ट्रिक इंजन में आरई (रेल विद्युतीकरण) विभाग के एसएसई (ओएचई) जीके बोहरा, चीफ लोको इंस्पेक्टर अमरचंद पंवार सवार रहे। अधिकारी पूरे मार्ग में इलेक्ट्रिफिकेशन की छोटी-मोटी खामियों को नोट करते रहे। इंजन को लोको पायलट उमेश अग्रवाल व सहायक लोको पायलट महेश चंद्र ने चलाया।
चार बार मिली मंजूरी
रतलाम से नीमच तक के सेक्शन को सीआरएस ने चार बार रतलाम-धौंसवास, धौंसवास-जावरा, जावरा-मंदसौर और मंदसौर-नीमच का निरीक्षण कर मंजूरी दी है। रेलवे को फरवरी से अक्टूबर तक का समय लग गया।
अभी नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच चल रहा काम
इलेक्ट्रिफिकेशन का काम वर्तमान में नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच चल रहा है, जो दिसंबर में खत्म होगा। इसमें भी नीमच से जावद रोड के बीच ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन डाली जा रही है, जबकि चित्तौड़गढ़ से शंभुपुरा के बीच पोल लगाने के फाउंडेशन के साथ ओएचई भी डाली जा रही है। शुरुआती टेस्टिंग के बाद जनवरी में इस सेक्शन का सीआरएस निरीक्षण हो सकता है।